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Anshu Awasthi

Romance Tragedy

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Anshu Awasthi

Romance Tragedy

रिवाज़ नहीं

रिवाज़ नहीं

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यूं तो रिवाज़ नहीं जन्मदिन पर

आपके आपसे ही कुछ मांग लूं।


पर सिद्दत है की कोई और नहीं-

उन सुर्ख लवों ने जो दवा रखी है,


खुर्शीद में ओस की बूंदों सी

चमकती वो शादाब हंसी।


वो बेशकीमती मोतियों की कतार-

जो आपने छिपा रखें हैं अपने,


रुसवाइयों के शबिस्तान में

'अंशु' वो इसकी मुस्तहक़ नहीं।


उन्हें दे लेने दीजिए मुबारकबाद

मुत्तसिल हो मेरी ख्वाहिशों से।


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