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मिली साहा

Abstract

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मिली साहा

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रिश्तों में मिठास

रिश्तों में मिठास

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हर रिश्ता प्यार का होता है प्यार से निभाना चाहिए,

विश्वास से बंधे होते रिश्ते एहसास समझना चाहिए,

रिश्ते बनते दिल से दुनिया को दिखाने के लिए नहीं,

रिश्ते ऐसे नहीं निभाते हैं उनमें मिठास होना चाहिए,


रिश्तो में गर मिठास हो तो हर दर्द यहाँ बेगाना लगे,

पल दो पल की इस ज़िंदगी में हर लम्हा तराना लगे,

थोड़ा वक्त एक दूजे के लिए सभी रिश्तो में जरूरी,

आपस में हो तालमेल, खूबसूरत सारा ज़माना लगे,


रिश्ता कभी रूठना कभी मनाना कभी है समझौता,

अपनेपन का इत्र छिड़ककर है प्यार से सींचा जाता,

प्यार के अभाव में बंजर हो जाती रिश्तो की जमीन,

खो देता है अनमोल रिश्ता जो यह बात न समझता,


कभी झुकना पड़े अपनों के लिए थोड़ा झुक जाना,

कोई जाए दूर,रोकने की एक कोशिश ज़रूर करना,

ज़िन्दगी के सफ़र में चलोगे जब हाथ थाम कर तुम,

कभी रुकना पड़े साथ चलने के लिए तो रुक जाना,


रिश्ते बनाना आसान और मुश्किल होता है निभाना,

वक्त न दिया रिश्तो को,तय है हकड़वाहट का आना,

नज़दीकियां हों रिश्तो में तो मिठास रहती बरकरार,

पर रिश्तो को कैद करने की कभी कोशिश न करना,


रिश्तो के लिए भी जरूरी है खुली हवा में सांँस लेना,

कुछ अपने मन की कहना तो कुछ उनकी भी सुनना,

रिश्तो में ज़्यादा मिठास भी ज़हर का रूप ले लेती है,

इसलिए तो ज़रूरी है रिश्तों में तालमेल बनाए रखना।


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