Shreya Singh
Drama
रिश्तों को कैफियत
दीजिए हुज़ूर
ज़िन्दगी सिर्फ
साँसों से चलती नहीं है।
रंग दे बसंती ...
ना जाने क्यूँ...
अब फ़र्क़ नहीं ...
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खामोशियाँ
रिश्ते
हिंदुस्तान
मेरा भारत महा...
ये कैसी माया?
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
पुरुषोत्तम श्री राम भी आये गिरधारी घनश्याम भी आये पुरुषोत्तम श्री राम भी आये गिरधारी घनश्याम भी आये
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
पुरुष अक्सर मुझसे पूछते हैं, 'तुम्हारी महिला पात्र इतनी पागल क्यों हैं?' पुरुष अक्सर मुझसे पूछते हैं, 'तुम्हारी महिला पात्र इतनी पागल क्यों हैं?'
हजारों बातें सुनना है इस घर की तुम बहु हो अब तुम्हें सब समझना है हजारों बातें सुनना है इस घर की तुम बहु हो अब तुम्हें सब समझना है
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
महाकाली की क्षुधा अब भी पापियों के रक्त हेतु अशांत है। महाकाली की क्षुधा अब भी पापियों के रक्त हेतु अशांत है।
तेरे सवाल का बस इतना सा जवाब है, ना पहले से रहे हम तुम ना पहले जैसे अब हालात है।। तेरे सवाल का बस इतना सा जवाब है, ना पहले से रहे हम तुम ना पहले जैसे अब हालात...
इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है इस बार सबको अनदेखा कर उनका हाथ थामना जिनको बस अपनों की तलाश है
सुबह की खिली हुई धूप का करो,स्वागत इस धूप में मिली हुई है,खुदा की मोहब्बत। सुबह की खिली हुई धूप का करो,स्वागत इस धूप में मिली हुई है,खुदा की मोहब्बत।
बिन ब्याही औरत किसी मर्द के साथ रहे तो वह 'रखैल' हुयी.. बिन ब्याही औरत किसी मर्द के साथ रहे तो वह 'रखैल' हुयी..
मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ? मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ?
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है। उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है...
ये कविता समाज में महिला व् पुरुष के बीच जो भेदभाव होता है, उसपर लिखी हुई है। उम्मीद करती हु आपको पसद... ये कविता समाज में महिला व् पुरुष के बीच जो भेदभाव होता है, उसपर लिखी हुई है। उम्...
आपके दोस्त आपसे मिलने के पहले मिनट में आपको बेहतर तरीके से जान पाएंगे, आपके दोस्त आपसे मिलने के पहले मिनट में आपको बेहतर तरीके से जान पाएंगे,
दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं. दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं.
क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता ! क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता !
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...