रिश्ता सदियों का ....
रिश्ता सदियों का ....
उसके बिना इक पल भी रह नहीं पाते हम,
पल भर को भी जो वो दूर होता है मुझसे जान मेरी निकल जाती है,
दिल वो ले गया मेरा और अपना दे गया मुझको,
उसकी धड़कने हर पल मेरा ही नाम लेती है,
उसके दिल का आलम भी शायद ये ही होगा,
जब भी वो हम को पुकारता होगा अपने करीब पाता होगा,
साया बनकर वो हमारे और हम उसके साथ रहते है,
प्यार की ये शमा जल रही है इधर भी उधर भी,
दोनों तरफ ही मिलने की चाहत एक सी लगी हुई है,
दूर होकर भी दिल के करीब करीब रहते है,
काश ये इंतजार के पल खत्म हो जाये,
प्यार हमारा है सच्चा शायद युगों युगों का ये नाता है,
यूं ही किसी को मिलने की तमन्ना कभी जगती नहीं है,
दिल को कौन कब भा जाए ये कोई नहीं जानता,
सच ही कहते है ऊपर वाला ही सब को मिलाता है,
जोड़ियां बनती भी उसकी मर्जी से है मिलती भी उसकी मर्जी से,
यूं ही कोई दिल को भाने नहीं लगता,
कोई तो रिश्ता होता है सदियों सा पुराना,
जो रूप नया लेकर फिर से सामने आता है ।
