STORYMIRROR

Anand Kumar

Romance

3  

Anand Kumar

Romance

रौशनी का एक दरिया

रौशनी का एक दरिया

1 min
434

पूरब की ओर खड़ा

मैं उगते सूरज को निहार रहा था।


कुछ सोच कर यूँ ही 

सूरज को देखते हुए आँखें बंद की।

 

आँखों में तेरा चेहरा तैर गया 

और नज़र आया, रौशनी का एक दरिया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance