Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

Saroj Acharya

Abstract


4.1  

Saroj Acharya

Abstract


रात एक मासूम लड़की

रात एक मासूम लड़की

1 min 288 1 min 288

कुछ यादों ने रात छेड़ दी

नींद को बुरा लग गया

कई बार कहा रात को,

सिर झुका कर,चुपचाप आया जाया कर

ख़बरदार!!!!

तारों का दुपट्टा सर से न सरके

न हो तो,अँधेरे की काली चादर ओढ़ ले

ख़ामोश सी नज़र नीचे किये चल

यहाँ उम्र की कई शिकायतें रहती हैं

कोई भी रास्ता रोक कर

आंसुओं से टोक कर

कुछ तोहमतें याद दिला देगा

यादों के झुरमुट में खींच लेगा वक्त

नींद कितना बचाएगी तुझे ?


Rate this content
Log in

More hindi poem from Saroj Acharya

Similar hindi poem from Abstract