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Dr. Saroj Acharya

Abstract Romance


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Dr. Saroj Acharya

Abstract Romance


अस्मिता मेरी

अस्मिता मेरी

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ये प्यार अगर मेरे आँसुओ की

सिफ़ारिश है तो, रहने दो

"मेरा हृदय जल्दी द्रवित हो जाता है"

ये प्यार स्वभावगत, दया हो 

 तो रहने दो


यदि समझो कि ये प्यार अधिकार है मेरा 

तो दो,वरना

रहने दो

यदि प्यार सब के लिए हो,समान हो

तो,रहने दो


प्यार को प्यार से सहेजना ही प्यार है

सहेज पाओ तो ठीक

वरना रहने दो

प्यार दिल से निकली बात है

कभी व्यावहारिक नहीं होता

समझ पाओ ,तो ठीक


वरना रहने दो

"मैं तो कोई शिकायत नहीं करता"

शिकायत की अपनी आबरू है

वो सिर्फ अपनो से होती है

ये अपनापन समझ पाओ,तो ठीक


वरना, रहने दो

तुमको कभी किसी से बांटा नही

अपने समय और तव्वज्जो को,बंटते

देखने की व्यथा समझ पाओ ,तो ठीक

वरना रहने दो


जो सिर्फ मेरा हो,और मुझे ही दे सको

जिसे ले कर मेरा अभिमान आहत न हो

मेरी मर्यादा किसी ,उपकार के बोध से न दबे

उस प्यार के प्रतिदान पर ,मुझ पर

सिर्फ तुम्हारा ही, अधिकार होगा

किसी संशय की कल्पना

भी,रहने दो।


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