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Disha Singh

Classics


2.3  

Disha Singh

Classics


रास लीला

रास लीला

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रंग भाए मुझें ,

रंग भाए तुझें,

रंग रंगीन हुई ये शाम की ,

राधा के संग मीरा गाये

कृष्णा में दासी तेरे नाम की ,


थिरके मेरे ताल तेरी बंसी से

नाचे ब्रजवासी सभी मदहोशी से 

मेघा बरसे, मोर नाचे 

कुहू कुहू पपीहा गाये 

कान्हा के संग गोपियाँ झूमे


मन कैसे न जले राधा के 

मैं न बोलूं कुछ, श्याम से 

ये देख कान्हा मंद - मंद मुस्काये

रूठे राधा को कैसे मनाओ 

लाल रंग के गुलाल से 


मोहे छेड़े पनघट पर 

हँसी सारी मोरी सखियाँ 

लाज न आये कृष्णा को 

नटखट कृष्णा ही जाने उनकी महिमा 

"निधिवन" में करे कृष्णा राधा रासलीला।


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