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Neeraj pal

Inspirational

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Neeraj pal

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रामाश्रम

रामाश्रम

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हे !ईश्वर की अमूल्य कृति ,तू क्यों इतना इठलाता है ।

तू धरोहर है किसी और की, बेवजह मुस्काता है।।


 चौरासी लाख जन्मों को काट, बड़े भाग्य मानुष तन पाया।

 माया ने ऐसा जादू डाला, असली मकसद मैं समझ ना पाया।।


 ऐसो -आराम पाने के खातिर, तुमको ही मैं भूल गया।

 जब टूटे गर्दिश में तारे ,चौहु- दिश अंधकार में डूब गया।। 


तुमने तो हमेशा मुझको सादा, काम ,क्रोध, लोभ मैं छोड़ ना पाया ।

शर्मसार होने के खातिर ,अन्तरवेदना को मैं कह ना पाया।।


 तुम तो रखते सबकी खबर हो, वरद- हस्त सब पर ही रखते।

 श्रद्धा- विश्वास कैसे मैं लाऊँ, विषय -वासना हरदम घेरे रखते।। 


सत्संगी तो बन ना पाया ,ना ही ले पाया नाम तुम्हारा।

 पुण्य की तो बात ही छोड़ो , गलत काम का ही लिया सहारा।।


 लेकिन फिर भी आस लगी है, भटके को तुम राह दिखलाते।

 अंतिम विनय है इस "नीरज" की, "रामाश्रम" में पापी भी तर जाते।।


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