STORYMIRROR

ज्योति किरण

Romance

2  

ज्योति किरण

Romance

राज़-ए-दिल

राज़-ए-दिल

1 min
136

कहते हैं अल्फ़ाज़ों से उलझना छोड़ दो

हमने कहा, तुम हमसे लड़ना छोड़ दो।


गर तुम सताओगे तो हम कहाँ जाएंगे

क़लम की नोक से काग़ज़ ही रूलाएंगें।


मुस्कुरा कर बोले राज़ एक बताता हूँ मैं

सिर्फ़ तुम्हें पढ़ने के लिए ही सताता हूँ मैं।


हम भी इतराए और राज-ए-दिल खोल दिया

जो ज़बां न कह पाई, आँखों ने बोल दिया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance