प्यासे ही रह जाऊँगी
प्यासे ही रह जाऊँगी
तेरी यादों में प्रियतम ! मैं तो प्यासी रह जाऊँगी !
इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?
तस्वीरों में तेरी सूरत देखूँ फिर भी हमको चैन कहाँ ?
सपनों में आकर चले जाना झलक दिखाना ठीक कहाँ ?
अब इस विरह व्यथा को कैसे मैं सह पाऊँगी ?
इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?
कह कर गए थे झट आएंगे मुझको वहीं पे ले जाएंगे !
लगता है सावन सूना था जाड़े में भी ना मिल पाएंगे !!
दिन तो कट जायेंगे मेरे रातों में मैं घबरा जाऊँगी !
इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?
बातें होती हैं, दर्शन होता है पर मिलने का सौभाग्य कहाँ ?
कब तक मैं यूं ही रहूँगी मिलने की है आस कहाँ ?
आ जाओ मेरे प्रियतम अब तेरे बिन ना रह पाऊँगी !
इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?

