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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Romance

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Dr Lakshman Jha "Parimal"Author of the Year 2021

Romance

प्यासे ही रह जाऊँगी

प्यासे ही रह जाऊँगी

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तेरी यादों में प्रियतम ! मैं तो प्यासी रह जाऊँगी !

इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?

तस्वीरों में तेरी सूरत देखूँ फिर भी हमको चैन कहाँ ?

सपनों में आकर चले जाना झलक दिखाना ठीक कहाँ ?

अब इस विरह व्यथा को कैसे मैं सह पाऊँगी ?

इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?


कह कर गए थे झट आएंगे मुझको वहीं पे ले जाएंगे !

लगता है सावन सूना था जाड़े में भी ना मिल पाएंगे !!

दिन तो कट जायेंगे मेरे रातों में मैं घबरा जाऊँगी !

इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?


बातें होती हैं, दर्शन होता है पर मिलने का सौभाग्य कहाँ ?

कब तक मैं यूं ही रहूँगी मिलने की है आस कहाँ ?

आ जाओ मेरे प्रियतम अब तेरे बिन ना रह पाऊँगी !

इतने दूर रह के साजन कैसे मैं कब मिल पाऊँगी ?


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