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Abhishek Singh

Romance

4  

Abhishek Singh

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प्यार या चाहत ?

प्यार या चाहत ?

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प्यार वहीं बिखर जाता है

ख़ुद से न सिमट पाता है।

बदले उसके जब-जब,

उमीद कोई, जुड़ता जाता है।


करो प्यार,न बदले इसके,

चाहत की तुम, मंशा पूरी।

ख़ुद प्यार पिघलेगा, देगा,

चाहत की हर, मंशा अधूरी।


क़दर करो तुम चाहत की,

प्यार में हर एक आहट की।

सुख में ही, न तुम, साथी बनो,

दुःख में भी भागीदारी करो।


प्यार करो तो प्यार से।

बदले न कोई चाह से।


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