STORYMIRROR

S Ram Verma

Abstract

4  

S Ram Verma

Abstract

प्यार की गर्माहट !

प्यार की गर्माहट !

1 min
352

छोटी छोटी रुई के 

से टुकड़े आकाश से 

गिर कर बिछ जाते हैं

 

पूरी की पूरी धरा पर

सफ़ेद कोमल मखमली 

चादर की तरह तेरा 

प्यार भी तो कुछ 

कुछ ऐसा ही है


बरसता है इन्ही रुई 

के फाहों की तरह 

और फिर बस जाता है।


मेरे इस दिल की सतह 

पर बिलकुल शांत श्वेत 

चादर की तरह उस में 

बसी तेरे प्यार की गर्माहट।

 

मुझे देती है हौसला 

जिस के सहारे मैं 

उबर सकूं ज़िन्दगी 

की कड़ी धूप से !   


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract