STORYMIRROR

Paramjeet Singh

Classics

3  

Paramjeet Singh

Classics

पुराना बरगद

पुराना बरगद

1 min
246

था इक पेड़ बड़ा अलबेला

एकांत सड़क पर खड़ा अकेला

आते जाते राही बैठें 

लें छाया का भरपूर आनंद

सुन्दर हरे भरे पत्ते


हिलते जब भी मंद मंद

मैं भी बैठा इक दिन वहां

शांत माहौल सारा था

चीं-चीं चूं-चूं की मधुर आवाजें

ऐसा सुन्दर नजारा था


वास्तव में वो पेड़ नहीं था

अंदर जीवों का आशियाना

शीतल ठंडी हवा और छाया

राहगीरों का आना-जाना


ऐसा स्थान कहां देखा

हर इंसान जहां गदगद था

वो पीपल था न नीम था

वो पेड़ पुराना बरगद का।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics