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Vigyan Prakash

Romance

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Vigyan Prakash

Romance

पुकार

पुकार

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तू पुकार है,

किसी और वक़्त में,


दी हुई आवाज की गूँज,

जो आज लौट आई है,


टकराकर,

उन पहाड़ों से,


जिनमें उन्हें खो जाने को,

भेजा गया था।


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