Zahiruddin Sahil
Romance
वो बारिश की
पहली फुहार हो
या किसी मौसम का
तक़ाज़ा
हर शै जैसे
उसी का हवाला
देती है
तुम मानो या
या न मानो
वो एक गुलाब है
जिसका पता
हर ख़ुशबू देती है !!!
सुबह
रंग ए वतन
भेज भइया को ब...
आशियाना
अमल
इशारों क...
बुलावा
पैगाम
आँगन
होने से
जिन्हें बनने के क्रम में मैं कई बार चखता हूँ। हाँ, मुस्कुराहटें कैद हैं। जिन्हें बनने के क्रम में मैं कई बार चखता हूँ। हाँ, मुस्कुराहटें कैद हैं।
तेरे हुस्न तग़ाफ़ुल के मैं सौ बार सदके सुर्ख होते हुए इन लबों रुखसार पर सदके। तेरे हुस्न तग़ाफ़ुल के मैं सौ बार सदके सुर्ख होते हुए इन लबों रुखसार पर सदके।
जी ली कुछ तुमने कुछ मैंने ऐसी थी कहानी उलफ़त की। जी ली कुछ तुमने कुछ मैंने ऐसी थी कहानी उलफ़त की।
मैं कहना चाहता हूँ, कि इश्क़ से मेरा अभिप्राय, कल तुम थी, आज तुम हो ... मैं कहना चाहता हूँ, कि इश्क़ से मेरा अभिप्राय, कल तुम थी, आज तुम हो ...
हम किताबों में अब ढूँढे जाने लगे जाने कब, क्या हुआ, कुछ ख़बर ना लगी। हम किताबों में अब ढूँढे जाने लगे जाने कब, क्या हुआ, कुछ ख़बर ना लगी।
अश्कों के सुनामी कितने देर रात तकिए के गिलाफ़ पर, जज़्ब करता है तू भी! अश्कों के सुनामी कितने देर रात तकिए के गिलाफ़ पर, जज़्ब करता है तू भी!
मैं लौट आता हूँ तुम्हारे पास और खो जाता हूँ तुममें। मैं लौट आता हूँ तुम्हारे पास और खो जाता हूँ तुममें।
मैं देख पाता हूँ किसी अनंत सुरंग में जहाँ कहीं दूर से प्रकाश का एक बिम्ब । मैं देख पाता हूँ किसी अनंत सुरंग में जहाँ कहीं दूर से प्रकाश का एक बिम्ब ।
दूरियों की सीलन हटे और प्रेम का संचार हो। दूरियों की सीलन हटे और प्रेम का संचार हो।
जो हमने उठाए सवाल तो तुम जीने के नाजो नियम याद दिला गए। जो हमने उठाए सवाल तो तुम जीने के नाजो नियम याद दिला गए।
तेरे चेहरे पे लटके लटों को हल्के से हटाने की ख्वाहिश। तेरे चेहरे पे लटके लटों को हल्के से हटाने की ख्वाहिश।
संभवतः तुम्हारे लौट आने से लौट आएंगे - बादल, बारिश और चिड़ियां हरे जंगलों में ! संभवतः तुम्हारे लौट आने से लौट आएंगे - बादल, बारिश और चिड़ियां हरे जंगलों ...
मैं हैरान हूँ ये तुम्हारी थी मुस्कुराहट, रेशम सी गुलाबी मैं हैरान हूँ ये तुम्हारी थी मुस्कुराहट, रेशम सी गुलाबी
कभी प्यार और इकरार करती हैं कभी इजहार तो इनकार करती हैं कभी प्यार और इकरार करती हैं कभी इजहार तो इनकार करती हैं
मेरी सांसो में अब भी ख़ुशबू हैं, कैसे होती है मोहब्बत सिखाई उसने! मेरी सांसो में अब भी ख़ुशबू हैं, कैसे होती है मोहब्बत सिखाई उसने!
मुझे बहुत पसन्द हैं तुम्हारी लम्बी खूबसूरत उंगलियां! मुझे बहुत पसन्द हैं तुम्हारी लम्बी खूबसूरत उंगलियां!
मेरी दरगाह की धूप बत्ती बनकर उसको भी संग मेरे जलना तो होगा। मेरी दरगाह की धूप बत्ती बनकर उसको भी संग मेरे जलना तो होगा।
पर पता नहीं कैसे तेरे ना होने पर भी तेरा होना महसूस कराती है। पर पता नहीं कैसे तेरे ना होने पर भी तेरा होना महसूस कराती है।
सर्दी का मौसम और रुहानी शाम गर्म चाय की प्याली और उनका साथ। सर्दी का मौसम और रुहानी शाम गर्म चाय की प्याली और उनका साथ।
शब्दों में नहीं महज़ आंखें से बतियाता हूं। शब्दों में नहीं महज़ आंखें से बतियाता हूं।