Zahiruddin Sahil
Inspirational Others
ये सुबह की मुलाक़ात ये रब की बंदगी
आप मानो या ना मानो
एक टुकड़ा है रोशनी
सुबह
रंग ए वतन
भेज भइया को ब...
आशियाना
अमल
इशारों क...
बुलावा
पैगाम
आँगन
होने से
सागर के तह में जो बूँद जम जाए, वह मोती कहलाए। सागर के तह में जो बूँद जम जाए, वह मोती कहलाए।
याद रहे किसीसे भी हाथ नहीं मिलाओगे हाथ जोड़ प्यार तथा सम्मान जताना है... याद रहे किसीसे भी हाथ नहीं मिलाओगे हाथ जोड़ प्यार तथा सम्मान जताना है...
ज़रूर कोहराम मचा रहा है अभी मौका तो दो, हंसकर साथ इसे भी कर लेंगे हम सभी। ज़रूर कोहराम मचा रहा है अभी मौका तो दो, हंसकर साथ इसे भी कर लेंगे हम सभी...
जिनसे वर्षों से रंजिश है उनसे भी यारी बन जाए खुशियों के रंग में सराबोर होली हमारी बन ज जिनसे वर्षों से रंजिश है उनसे भी यारी बन जाए खुशियों के रंग में सराबोर होली ह...
एक कुहासा जो किरणों से औ खेल रहा हँस कर अपनो से सूर्य -से इस मेरे चरित्र से एक कुहासा जो किरणों से औ खेल रहा हँस कर अपनो से सूर्य -से इस मेरे चरित्र स...
कामना ही दुख की जननी है, जो हमको भटकाती है। कामना ही दुख की जननी है, जो हमको भटकाती है।
नहीं रखना चाहती किसी से अपनी रक्षा की उम्मीदें मैं अपनी अंगरक्षक खुद बनना चाहती हूँ नहीं रखना चाहती किसी से अपनी रक्षा की उम्मीदें मैं अपनी अंगरक्षक खुद बनना...
जब बतायेगी वो मेरा योगदान पा जाऊंगी मैं निर्वाण। जब बतायेगी वो मेरा योगदान पा जाऊंगी मैं निर्वाण।
रैळ छैळ भरपूर दे सब आसाओं पूर दे आस माता आस दे। रैळ छैळ भरपूर दे सब आसाओं पूर दे आस माता आस दे।
जैसे किरण का छोर हो, वर्षा कोई घनघोर हो । ज़िन्दगी के तूफ़ान में- तनिक न कमज़ोर हो । जैसे किरण का छोर हो, वर्षा कोई घनघोर हो । ज़िन्दगी के तूफ़ान में- तनिक ...
जीभ इतनी मनचली पहले न थी, आत्म अनुशासन के शासन से बंधी थी । चर अचर सब अपने हित औ' मीत जीभ इतनी मनचली पहले न थी, आत्म अनुशासन के शासन से बंधी थी । चर अचर सब अपने...
बचे हुए इन सांसों के पल में,अपनी बाँहों में लीजिए। बचे हुए इन सांसों के पल में,अपनी बाँहों में लीजिए।
कहते हैं बेटा मान है, तो बेटी है गुमान कहते हैं बेटा मान है, तो बेटी है गुमान
तलवार की ताकत से बढ़कर, तेरी क़लम है क्या फनकार है इसमें ज़माने को दिखा दो ज़रा तलवार की ताकत से बढ़कर, तेरी क़लम है क्या फनकार है इसमें ज़माने को दिखा दो ज़रा
काँप रही साँसें उनकी, जो हमको जीवन देते राह-राह, डगर-डगर में, वृक्ष बचाना ही होगा। काँप रही साँसें उनकी, जो हमको जीवन देते राह-राह, डगर-डगर में, वृक्ष बचाना ही...
और उस काश की खयाल पूरी हो जाती काश में जान पाती। और उस काश की खयाल पूरी हो जाती काश में जान पाती।
उम्मीद के गर्भ में अब भी ख्वाबों का एक घरौंदा है। उम्मीद के गर्भ में अब भी ख्वाबों का एक घरौंदा है।
धर्म छुट्टी पर है । विज्ञान एवं संविधान ड्यूटी पर है । धर्म छुट्टी पर है । विज्ञान एवं संविधान ड्यूटी पर है ।
हां मुझे है वह मास्क बनाना जो बचा सके तबाही से, बर्बादी से। हां मुझे है वह मास्क बनाना जो बचा सके तबाही से, बर्बादी से।
मैं भारत की नारी हूं सब पुरुषों पर भारी हूं बाधाएं चाहे कितनी हों समय से नहीं मैं मैं भारत की नारी हूं सब पुरुषों पर भारी हूं बाधाएं चाहे कितनी हों समय ...