Zahiruddin Sahil
Inspirational Others
ये सुबह की मुलाक़ात ये रब की बंदगी
आप मानो या ना मानो
एक टुकड़ा है रोशनी
सुबह
रंग ए वतन
भेज भइया को ब...
आशियाना
अमल
इशारों क...
बुलावा
पैगाम
आँगन
होने से
अपने आंचल का देकर स्पर्श ,तुमने प्यार अपना बरसाया है। अपने आंचल का देकर स्पर्श ,तुमने प्यार अपना बरसाया है।
काश, यह जीवन का जादू एक नया संसार खोल दे, हमारे पूरे जीवन को ख़ुशियों से भर दे। काश, यह जीवन का जादू एक नया संसार खोल दे, हमारे पूरे जीवन को ख़ुशियों ...
एक प्यारा आध्यात्मिक मिलन, अनुष्ठान ही विवाह है। एक प्यारा आध्यात्मिक मिलन, अनुष्ठान ही विवाह है।
स्त्री कुछ ऐसी ही रची गयी जिन पे छत टिकी, उन दीवारों को संभालती है। स्त्री कुछ ऐसी ही रची गयी जिन पे छत टिकी, उन दीवारों को संभालती है।
सदियों से बुद्धि व भाग्य में यह प्रतिद्वंद है चला सदियों से बुद्धि व भाग्य में यह प्रतिद्वंद है चला
सूरज मुखी का बाग भरपेट रोटी छप्पन साग। सूरज मुखी का बाग भरपेट रोटी छप्पन साग।
जग में आते ही मनुज, पाता है परिवार! मात-पिता की गोद में, है सुन्दर संसार!!१ जग में आते ही मनुज, पाता है परिवार! मात-पिता की गोद में, है सुन्दर संसार!!१
काला सफेद के बीच फंस गया रंग बेचारा सिलेटी, ना ही स्याह ना ही उज्जवल ज्यों राख की हो। काला सफेद के बीच फंस गया रंग बेचारा सिलेटी, ना ही स्याह ना ही उज्जवल ज्यों रा...
आज जरा अंतर्मन झांको, एक राम वहाँ विराजे हैं. आज जरा अंतर्मन झांको, एक राम वहाँ विराजे हैं.
निर्झर का कल कल स्वर मानो जीवन संगीत सुनाए, सुख दुःख को साथ अपने लेकर, निर्झर बहता जाए। निर्झर का कल कल स्वर मानो जीवन संगीत सुनाए, सुख दुःख को साथ अपने लेकर, निर्झर...
उजड़े मन-उपवन में प्यारे ,आशा का शुचि दीपक धरना। उजड़े मन-उपवन में प्यारे ,आशा का शुचि दीपक धरना।
जीवन के रहस्य को कौन समझ पाया है, जीवन के रहस्यों ने बड़ा उलझाया है। जीवन के रहस्य को कौन समझ पाया है, जीवन के रहस्यों ने बड़ा उलझाया है।
मेरी प्यारी बच्चियों जिन्दगी फिल्म नहीं होती। मेरी प्यारी बच्चियों जिन्दगी फिल्म नहीं होती।
खुली किताब सा है जीवन किंतु यह माने कौन, पढ़ते तो सब हैं परन्तु मुझे समझना चाहे कौन। खुली किताब सा है जीवन किंतु यह माने कौन, पढ़ते तो सब हैं परन्तु मुझे समझना चा...
अलग-अलग किरदारों से सजा,यह दुनिया एक मेला है। अलग-अलग किरदारों से सजा,यह दुनिया एक मेला है।
निज चमन के बनेंगे जब हम माली, होगी सार्थक तब ही होली-दिवाली। निज चमन के बनेंगे जब हम माली, होगी सार्थक तब ही होली-दिवाली।
मुझे मोक्ष मत देना मोहन, मत करना मुक्ति मार्ग प्रशस्त। मुझे मोक्ष मत देना मोहन, मत करना मुक्ति मार्ग प्रशस्त।
एक कर्मठ और सृजनशील मजदूर नहीं मनाता मजदूर दिवस। एक कर्मठ और सृजनशील मजदूर नहीं मनाता मजदूर दिवस।
भय की परिभाषा अलग- अलग जो किसी के लिये डरावना है, वह किसी के लिये सुहावना है। भय की परिभाषा अलग- अलग जो किसी के लिये डरावना है, वह किसी के लिये सुहावना ...
स्वयं को करो नमस्कार, मिलो स्वयं से, करो साक्षात्कार। स्वयं को करो नमस्कार, मिलो स्वयं से, करो साक्षात्कार।