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आकिब जावेद

Romance

5.0  

आकिब जावेद

Romance

पता है मुझे

पता है मुझे

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अनसुलझा हुआ सा हूँ

थोड़ा सुलझा दो मुझे भी

कहीं खोया हुआ सा हूँ

खुद से मिला दो मुझे भी

..

नही मिला पाओगे मुझे

मुझमे ही डूब जाओगे

हाँ पता है मुझे....


वो साथ मेंरे यूँ चलना तेरा

हाथो में हाथ मेरे रखना तेरा

वो हँसी पे यूँ हँसना तेरा

भूल गयी हो तुम सब

हाँ पता है मुझे...


घने कोहरे में मचलना तेरा

बारिश पे भींग जाना तेरा

वो आँखों में आँख डालना तेरा

खो गयी हो तुम कहीं

हाँ पता है मुझे...


अनसुलझा ही सही

सुलझा दो मुझे

हकीकत में ना सही

ख्वाबो में फिर..

वैसे खुद से मिलवा दो मुझे..

नहीं कर पाओगी तुम...

हाँ पता है मुझे...


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