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Praveen Gola

Inspirational

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Praveen Gola

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पशु प्रेम

पशु प्रेम

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एक अपनत्व सा होने लगा है ,इस बेजुबान कछुये से मुझे ,

जो शब्द एक ना बोले मुझसे ,फिर भी लगता कितने शब्द कहे।

पाँच साल पहले आया था ये ,घर में मेरे किसी नदी से ,

देख इसे मैं हुई थी बहुत खुश ,टूवी नाम देकर पुकारा था उसे।

वो क्या खाता और क्या पीता था ,ये सब भी मालूम ना था मुझे ,

पर बिन कहे ही सब समझ गई मैं ,जब पशु प्रेम की चाह जगी मुझमे।

धीरे - धीरे हम बातें करने लगे ,मेरे शब्द उसके कानों में पड़ने लगे ,

मेरे खाना डालने पर वो उछल जाता ,सचमुच उसे देख तब बड़ा मज़ा आता।

फिर आया उसका जन्मदिवस अगले वर्ष ,उसी तिथि को जब वो आया था मेरे घर ,

मैने अपने हाथों से उसके वस्त्र बनाये ,ज़िन्हे पहन वो और खूबसूरत लगता जाये।

सच पूछो तो ये पशु प्रेम होता बड़ा निराला ,एक पालतू पशु आपके घर में भरता उजियारा ,इसलिये एक पशु सब ज़रूर पालतू बनाओ ,और अपने जीवन को निर्मल करते जाओ।|


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