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Vijeta Pandey

Inspirational

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Vijeta Pandey

Inspirational

सीमा मुक्त

सीमा मुक्त

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दर्पण हृदय का जो तोड के आघात करे,

जीवन में एसा कोई मीत नहीं चाहिये

और अश्रुधारा बहे दिन रात्री इन नैनो से

अधरों पे एसा कोई गीत नहीं चाहिये


प्रेम से परे नहीं मैं चिड़िया इसी बाग की

पर बन्धंन सा लगे वो मलाल नही चाहिये

और पंखो को मेरे तार तार करे नोचकर

शिकारी का फैलाया एसा जाल नहीं चाहिए


रात्री और दिवस की सीमाओ में बंधा हो जो

एसा कुण्ठित आसमान नहीं चाहिये

तुम और मैं में भेद करे प्रीत से जो

कुरीतियों से भरा पासमान नहीं चाहिये


सीता हो राम की या राधा कृष्ण धाम की

चारित्र की अँकाई का विधान नहीं चाहिये

लक्ष्य पथ कठिन कटीला चाहे कितना हो

दया में विप्पति का निदान नहीं चाहिये।


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