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Vijeta Pandey

Inspirational


4.8  

Vijeta Pandey

Inspirational


तू बढ़ता जा

तू बढ़ता जा

1 min 35 1 min 35

जीवन कुछ नहीं देने वाला

तू स्वयं ही खुद का भाग्य बना

लक्ष्य की पथरीली राहों पर

तू अटल अडिग सा बढ़ता जा


मन मे संशय तनिक ना हो

क्षणिक सुख से भ्रमित ना हो

सुमति से विवेक की गति बढ़ा

तू अटल अडिग सा बढ़ता जा


समय बने तेरा सारथी

जग उतारे तेरी आरती

खुद में ऐसी अलख जगा

तू अटल अडिग सा बढ़ता जा


जब राहों मे संघर्ष मिले

योद्धा को तभी है हर्ष मिले

अंगद सा पाव धरा में जमा

तू अटल अडिग सा बढ़ता जा


कानों को जयकार मिले

गले फूलों के हार मिले

तेरा प्रयत्न ना किंचित घटे

ध्येय की एसी धूनी रंमा

तू अटल अडिग सा बढ़ता जा


तू अटल अडिग सा बढ़ता जा

तू अटल अडिग सा बढ़ता जा!


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