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Raghav Dixit

Inspirational

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Raghav Dixit

Inspirational

अतुलनीय संघर्ष

अतुलनीय संघर्ष

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लिखूं जोर दमदार लिखूं 

संघर्षों का अंबार लिखूं

सहसा मस्तक ने ठाना

पर सहज नहीं था कह पाना! 


हुआ जग का जिससे आदि सृजन 

उसे मिला भ्रमण को बन निर्जन

अवध का साम्राज्य हो

या कानन का राज्य हो 

जैसे उदय होता सूर्य हो 

या अस्त होता सूर्य हो! 


भावना से कर्तव्य को,

जिसने श्रेष्ठ माना 

सहज नहीं है संघर्षों को,

उनके कह पाना!! 


शोषितों को गले  लगाने को

वंचितों का अधिकार दिलाने को

संघर्षों से भिड़ जाने को

मानव का कर्तव्य बताने को

जिसने काननों के कंटकों का

आलिंगन किया

मरुभूमि के पथरीले पथ पर

जो चल दिया!


बड़ा कठिन है, ऐसे पथ पर

पग पग चलना

सहज नहीं है राघव के,

संघर्षों को कहना!! 


नारी सम्मान का मूल्य बताने को

चढ़ अधर्म पर जाने को 

श्रीराम ने सागर को बांध दिया 

आने वाली पीढ़ी को संदेश दिया

चाहे मानव मात्र हो 

या रावण सा सम्राट हो! 


नारी के सम्मान का मूल्य

अवश्य पड़ेगा चुकाना

सहज नहीं है राघव के

संघर्षों को कह पाना!! 


तृढ़ तिनकों की शैया को

भक्त केवट की नैया को

ऋषि मुनियों की टेरों को 

मां शबरी के बेरों को! 

जिसने, बैकुंठ से भी श्रेष्ठ माना 

सहज नहीं है राघव के

उन संघर्षों को कह पाना!! 


"अणु समूहों को सिखाया, जिसने मेरु से लड़ना

सहज नहीं था राघव के संघर्षों को कह पाना"!! 


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