STORYMIRROR

Praveen Gola

Tragedy

4  

Praveen Gola

Tragedy

बड़ी तकलीफ दे दी आपने

बड़ी तकलीफ दे दी आपने

1 min
39

बड़ी तकलीफ दे दी आपने,

बीच भँवर में छोड़ मेरा हाथ रे,

मैं तैरना जानती नहीं थी,

तब भी धक्का दे दिया आपने।


मुझे पल भर को ऐसा लगा,

जैसे मैं एकदम से डूब गई,

इन आँखों में ना चाहते हुए भी,

अश्रु धारा जोरों से फूट गई।


बड़ी तकलीफ दे दी आपने,

बीच भँवर में छोड़ मेरा हाथ रे।


मैंने आँख बंद कर भरोसा किया था,

यूँ ही थोड़ी ना ज़माने को दुश्मन किया था,

आपने एक झटके से कह दिया जाने को,

खत्म कर दिया किस्सा ना फिर सुनाने को।


बड़ी तकलीफ दे दी आपने,

बीच भँवर में छोड़ मेरा हाथ रे।


मैं अब भी सबको झूठा बहाना सुनाती,

हम दोनों के झगड़े का कारण बताती,

अपने दिल पर लगे गहरे घावों को,

और घहरा कर उसमें नमक मिर्च लगाती।


बड़ी तकलीफ दे दी आपने,

बीच भँवर में छोड़ मेरा हाथ रे।


मैं पागल थी जो तुम्हारे लिए रुकी हुई थी,

तुम समझदार निकले मेरा जुलूस बनाकर,

मेरे रोम रोम को बिना आकार दिये तुम,

चले गये मुझे मेरा आईना दिखाकर।


बड़ी तकलीफ दे दी आपने,

बीच भँवर में छोड़ मेरा हाथ रे।


मैंने हाथ पैर मार खुद को बाहर निकाला,

सोचा कि लूट गया एक लुटेरा लूटने वाला,

कहने सुनने को जब बाकी कुछ बचा ही नहीं,

तब क्यूँ ना खंजर घोंप गया मुझे चाहने वाला।


बड़ी तकलीफ दे दी आपने,

बीच भँवर में छोड़ मेरा हाथ रे।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy