पशु और मनुष्य
पशु और मनुष्य
पशु और मनुष्य साझी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं।
गाय, बैल, बकरी, भैंस,श्वान घर का हिस्सा रहे हैं।।
अब बनने लगे हैं फैशन पर्याय अकेलेपन साथी।
हमारी पंचतंत्र कहानियों में, नानी किस्सा रहे हैं।।
फोटो खिंचवाने के लिए अब ये बने आजीविका।
बहुत से एनजीओ में अब ये किताबी शिक्षा रहे हैं।।
आजकल बने ये, स्टेटस सिंबल,बुरे ग्रह शोषक।
घर के बाशिंदों के सुरक्षा चक्र, प्रतिरक्षा रहे हैं।।
बिल्ली पालती थीं ताई जी चूहों से सुरक्षा हित।
बकरी के बच्चे सासु मां के खिलंदड़ी बच्चा रहे हैं।।
कभी घर में पलते हाथी और घोड़े, बैलों की जोड़ी।
गाय,बकरी,भैंसों के बच्चे,दान,प्रतिदान दीक्षा रहे हैं।।
आज बस्तियां खाली हैं,श्वान कर रहे रखवाली हैं।
किसी की प्रतीक्षा में, मालिक का देख रास्ता रहे हैं।।
पशु प्रेमी की अनगिनत कहानी अनकही अन्जानी।
कभी खरगोश कभी कछुआ 'मीरा' घर शुभेच्छा रहे हैं।।
