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Dr Sushil Sharma

Inspirational Others


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Dr Sushil Sharma

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पर्यावरण

पर्यावरण

1 min 182 1 min 182

माता धरती तप रही, पर्यावरण विनिष्ट। 

भूल गए हैं आज हम, सभी आचरण शिष्ट। 


सभी आचरण शिष्ट, करें अपनी मनमानी। 

सूखे नदिया ताल, मरा आँखों का पानी। 


कहता सत्य सुशील, गाँव उजड़ा मैं पाता। 

शहर बने अनजान, सिसकती धरती माता। 


नदियाँ प्यासी हो रहीं, धरती है बेहाल। 

सूरज की चुभती तपन, पूछे कई सवाल। 


पूछे कई सवाल, प्रदूषण इतना भारी। 

साँसें हैं बेहाल, त्रस्त है दुनिया सारी। 


कहता सत्य सुशील, खड़ी द्वारे पर सदियाँ 

पूछें सख्त सवाल, कहॉं है प्यारी नदियाँ। 



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