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Shailaja Bhattad

Abstract

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Shailaja Bhattad

Abstract

प्रवाह हो

प्रवाह हो

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भावों की संभावनाएं हो।

 प्रयास में प्रवाह हो।


 प्रारब्ध का साथ हो।

 ख्वाहिशें भी अपार हों।


 अनुभवों में बहाव हो ।

  शब्दों का न अभाव हो ।


  कहना भी आसान हो।

  फिर लिखने में,

  क्यों न कुछ खास हो ?


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