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V. Aaradhyaa

Inspirational

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V. Aaradhyaa

Inspirational

प्रतिशोध

प्रतिशोध

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री! कलिके तेरा खिलना मेरी गति में अवरोध नहीं।

तुमसे किंचित प्रतिशोध नहीं!


मैं महाअघोरी शव साधक,

मुझको फूलों का काम नहीं।

पंचमकारी  कर्मों  में  रत,

वन्दन का मेरा धाम नहीं।


मैंने कीली हर शक्ति प्रबल स्यात तुम्हें है बोध नहीं।

तुमसे किंचित प्रतिशोध नहीं।


तंत्र क्रियाओं में मारण मैं,

उच्चाटन हर दास रहा है।

वशीकरण की नियति नहीं थी,

शमशानों में वास रहा है।


जो जगती उपवन कर दे ऐसा तो मेरा शोध नहीं।

तुमसे किंचित प्रतिशोध नहीं!


मैं हर सुख की समिधा जैसा,

जल जाते सुख के बोध सभी।

मैं स्वयम रक्त पी लेता निज,

छाता जो अन्तस् क्रोध कभी।


इस जीवन मे लिखा किसी से अब कोई अनुरोध नहीं।

तुमसे किंचित प्रतिशोध नहीं।



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