भारत के राष्ट्रीय प्रतीक,
जिनका मोल निराला है।
बाघ चला अति तीव्र गति,
राष्ट्रीय पशु कहलाया है।। 1
चारों दिशा में सिंह दहाड़ें,
शौर्य और साहस की परिभाषा।
अशोक स्तंभ का सिंह चतुर्मुख,
राष्ट्रीय चिह्न हमारा है।।2
सत्यमेव जयते अंकित नीचे,
सत्य की जीत सिखाता है।
न्याय और धर्म का चक्र बीच में,
गतिशीलता का पाठ पढ़ाता है।।3
केसरिया, सफेद और हरा रंग,
पिंगली वेंकैया ने रूप सजाया है।
नीले चक्र संग अंबर में झूमे,
तिरंगा राष्ट्रीय झण्डा कहलाया है।।4
गूँज उठा जब जन-गण-मन,
अंबर भी शीश झुकाता है।
बावन सेकण्ड का महामंत्र यह,
राष्ट्रीय गान कहलाता है।।5
रवीन्द्रनाथ की पावन कृति,
एकता का राग सुनाता है।
पंजाब, सिंधु, गुजरात, मराठा,
पूरा भारत एक कर जाता है।।6
'वंदे मातरम्' की पावन ध्वनि,
बंकिम चंद्र ने गाया है।
मातृभूमि की वंदना का यह,
राष्ट्रीय गीत कहलाया है।।7
अहिंसा के मार्ग पर चलकर,
जिसने गोरों को खदेड़ा था।
बापू महात्मा गाँधी को सबने,
'राष्ट्रपिता' कहकर पुकारा था।।8
मैथिलीशरण और दिनकर ने,
कलम से इंक़लाब जगाया है।
शब्दांजलि की अमर धरोहर,
'राष्ट्रकवि' का गौरव पाया है।।9
मेजर ध्यानचंद का जादू,
जिसने जग में लोहा मनवाया है।
स्टिक और गेंद का अद्भुत संगम,
हॉकी राष्ट्रीय खेल कहलाया है।।10
गज़गामी अपनी सजीली चाल से,
जंगलों की शान जो बढ़ाता है।
विशालकाय और बुद्धिमान जीव,
हाथी राष्ट्रीय विरासत पशु कहलाता है।।11
गोल-गोल और रस से डूबी,
स्वाद बड़ा ही न्यारा है।
हर उत्सव की शान जलेबी,
राष्ट्रीय मिठाई कहलाया है।।12
पाप-नाशिनी, पतित-पावनी,
हिमालय से जो आई है।
कल-कल बहती पावन गंगा,
राष्ट्रीय नदी कहलाई है।।13
'₹' का यह सुंदर चिह्न अनूठा,
उदय कुमार ने बनाया है।
आर्थिक ताकत की जो पहचान,
राष्ट्रीय मुद्रा 'रुपया' कहलाया है।।14
पंख फैलाकर मयूर नाचे,
सबके मन को हर्षाया है।
अदभुत छटा निराली इसकी,
राष्ट्रीय पक्षी कहलाया है।।15
कीचड़ में भी खिलकर सुंदर,
कमल देव-मन भाया है।
सत्य, शुद्धता का यह सूचक,
राष्ट्रीय पुष्प कहलाया है।।16
स्वाद अनूठा, फलों का राजा,
आम सभी ने खाया है।
रंग-रूप और रस से भरपूर,
राष्ट्रीय फल कहलाया है।। 17
शीतल छाया, अमर आयु ले,
बरगद गरिमा लाया है।
ज्ञान और विस्तार का प्रतीक,
राष्ट्रीय वृक्ष कहलाया है।।18
गंगा की लहरों में डोले,
डॉल्फ़िन ने मन मोहा है।
निर्मल जल की यह पहचान,
राष्ट्रीय जलीय जीव कहलाया है।।19