प्रथम मिलन
प्रथम मिलन
वो चांदनी उजियारी रात मन में अनकही बात ,
तुझसे नजरें झुका सहमी पहली मुलाकात!
********
वो चञ्चल निगाहें सधे हुए शब्द अनमोल,
मिलन उत्कंठा से लरजते रक्तिम कपोल!
******
हिमकणों से रात जम गयी धरा ने ओढ़ी मोती चुनर,
दमक रही शबनम की बूंदे भू पर सितारे बनकर
*******
दरख्तों को ढक दिया कोहरे ने बन चादर श्यामल,
दिनकर की किरणों ने होले से चुग लिए मुक्ताफल!
*********
आज सुबह की धूप सुहानी गुनगुनी थी,
तेरी यादों भी बड़ी मधुर मखमली थी !
*********
जुल्फ खुली गजरे की महक भीनी भीनी थी,
रुखसार पर गिरी शबनम की बून्द मोती सी थी।

