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Praveen Gola

Inspirational

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Praveen Gola

Inspirational

प्रकृति प्रेम

प्रकृति प्रेम

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प्रकृति के सौंदर्य को गीत बना दें, आओ अपनी कलम से उसे सजा दें।

जंगल की घनी छाँव में बहार है, पुष्पों की महक में खुशबू अपार है।

बादलों की छाँव से भीगी धरा है, गगन की ऊंचाइयों में अम्बर सजा है।

पहाड़ों की चोटियों से नदियाँ बहती हैं, किनारों से लहरें लहराकर कुछ कहती हैं।

हरियाली से सजी प्रकृति है बड़ी प्यारी, यहाँ खेलते पशु-पक्षी, चहचहाती हैं सारी।

सूरज की किरणों से धरा सजती है, सागर की लहरों से ध्वनि उठती है।

प्रकृति का यह खूबसूरत खेल है नायाब, इसलिये इसे समझें और संरक्षित रखें ज़नाब ।

अपनी अंतरात्मा से इसका संबंध जोड़ें, प्रकृति के लिए चलो हम भौतिक सुख छोड़ें ।

इस प्रेम भरे नाते को कुछ ऐसे निभायें , प्रकृति को हम स्वच्छ रखें और सम्मान पायें ।

बनायें संसार को सुंदर और स्वच्छ, प्रकृति को बचायें यही है कलयुगी सच।

ग्रो-ट्रीज के साथ बनायें नया एक मिशन, प्रकृति को बचाने की क्रांति का मनाये जशन ।

अपनी कविता और कहानी से लायें परिवर्तन, प्रकृति के प्रेम से खिले सब जगह ज्ञान का चमन ।।


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