परिवार
परिवार
चौतरफ़ा खतरे से बचाए जो, ऐसी छत्रछाया है परिवार,
हर मोड़ पर जहां खतरा मंडराता सर पर, ऐसी दुनिया में सुरक्षा का घेरा है परिवार.
जब अवसाद से ग्रसित होता हृदय, ख़ुशी की वजह बन जाता परिवार,
वेदना कैसे टिक पाएगी वहाँ, जहाँ साये की भांति साथ खड़ा हो परिवार.
मनमुटाव कितना भी हो जिस से, मुंह मोड़ के ना जी सकते, ऐसा भावनाओं का चक्रव्यूह है परिवार,
फीकी पड़ जाती जिसके समक्ष चमक हीरे के, ऐसी अनमोल मणि है परिवार.
बिखरे होते जब इसके सदस्य, तो निर्बल व बेजान सभी हो जाते,
संगठित जो होते ये सभी, तो सुदृढ़ एक शक्ति स्वतः ही बन जाते.
छल छलावे से लिप्त इस संसार में विश्वसनीय एक सहारा है परिवार,
गौरवान्वित एक दूसरे की उपलब्धियों पर होते,
वेदनाओं पर संग में हों जाते मायूस, अतुल्य प्रेम का भंडार है परिवार.
रगों में जिनकी सामान लहु दौड़ता, उनके मन मिल ही जाते हैं,
साथ होता जब परिवार का तो दुर्गम रास्ते भी सहज हो जाते हैं.
जैसे पुष्प की खिली पंखुड़ियाँ सुख-समृद्धि खुशियाँ फैलाती,
वैसे ही खुशहाल सदस्यों की संगत सर्वत्र अपनी भीनी भीनी महक बिखेर कर
जीने का एक नया उद्देश्य दे जाती.
कुशल वो हर इंसान है जिसने समझदारी से अपने परिवार को संगठित है रखा,
पूछ कर देखो उस से जो परिवार के सानिध्य से वंचित रह गया कि कितना अकेला,
निर्बल और लाचार जीवन पर्यंत उसने खुद को महसूस है किया.
शुकराना उस रब का कि मां-बाप का सर पर हाथ है,
भाई बहन का साथ है, रिश्तेदार सभी आस-पास हैं मेरे,
यही हैं संजीवनी बूटी मेरी जिनके सौजन्य से जीवन साकार है,
इनसे मिला है अस्तित्व जीवन को मेरे..
