STORYMIRROR

Manu Sweta

Romance

2  

Manu Sweta

Romance

प्रेम की पाती

प्रेम की पाती

1 min
346

मैं प्रेम की पाती

रोज ही लिखती

उसमे लिखती

अरमां सारे


सुख दुख की

लिखती परिभाषा

भावों के लिखती

सारे इशारे


तुम बिन कैसे

बीती रातें

कैसे कटते

दिन रैन ये सारे

रोज़ ही लिखती

रोज़ ही पढ़ती


लेकिन वो

प्रेम की पाती

बस तुम को

भेज न पाती।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance