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Navni Chauhan

Romance

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Navni Chauhan

Romance

प्रेम- कहानी

प्रेम- कहानी

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मैं प्रेम हूं,

ढाई आखर का 

हर्फ।

करूं भावों से अठखेलियां,

घोलूं जीवन में अर्थ।


भाव रूपी शब्दों

को,

मानो मिल गया संगीत।

कागज़, कलम, दवात 

अब बनने लगे,

मनमीत।


संसार के 

मोह पाश से जैसे,

छूट गया हो नाता।

सुख, कलेश, शंकाओं से,

अब मन नहीं भरमाता।


झरनों की झर- झर,

नदियों की कल- कल,

देने लगे हैं मिठास।

पंछियों की चहचहाहट,

मन में,

भरने लगीं उल्लास।


वायु के वेग में जैसे,

घुल गई हो महक।

खुशियों की खुशबू से,

फिज़ा गई चहक।


हरी- हरी घास जैसे,

मखमली हो गई।

रात के आंचल में सिमटकर,

भोर- गया सो गई।


शाम की ठंडी- ठंडी हवाएं,

बनने लगीं चित्तचोर।

मधुर ध्वनी व गीतों से

मन है भाव विभोर।


प्रतीक्षा के क्षणों में जैसे,

मिलने लगा सुकून।

आओगे जब तुम,

है वादा हमारा,

दिल में रखेंगे

महफूज़।


तुम साथ नहीं,

पर यादें हैं,

मधुर व मन- लुभानी।

मन से मन को जोड़ें,

आओ रच दें प्रेम- कहानी।


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