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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

प्रभु, ना निहार मेरी ओर

प्रभु, ना निहार मेरी ओर

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प्रभु, ना निहार मेरी ओर,

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे

मेरे सारे आँसू, मेरे सारे दुःख...


तेरी करुणा को देख

कहीं मैं बह न जाऊँ,

तेरी ममता की छाँव में

कहीं मैं ठहर न जाऊँ।

तू देगा भी तो क्या मैं पा लूंगा कोई सुख।


प्रभु, ना निहार मेरी ओर,

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे

मेरे सारे आँसू, मेरे सारे दुःख...


तू तो व्याप्त है कण-कण में,

सर्वत्र तेरा ही प्रकाश रहता है,

पर मैं, एक तिनका मात्र,

जो बस तेरी लहरों के संग बहता है।

हर तत्व में बसा है तेरा ही अंश,

मुझसे ही रह गया क्यों तू चुक!


प्रभु, ना निहार मेरी ओर,

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे

मेरे सारे आँसू, मेरे सारे दुःख...


पर यदि देखना ही है,

तो मेरे हृदय में झाँक,

जहाँ जंजीरों में बँधी हैं भावनाएँ,

तेरे ही बेबस अंशों को तू देख ना पाएगा,

ठहर ना जाएं कहीं तेरी ही निगाहें।

मुझमें समाने को कहीं तू भी ना जाए रुक।


प्रभु, ना निहार मेरी ओर,

मैं छुपाना चाहता हूँ तुझसे

मेरे सारे आँसू, मेरे सारे दुःख...


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