प्रभु की कृपा।
प्रभु की कृपा।
अगर चाहते हो कृपा प्रभु की, सेवा उनकी करनी होगी।
तन, मन, धन तू करदे अर्पण, परीक्षा तुझको देनी होगी।।
हर सेवा का एक मापदंड है, मन की सेवा बड़ी कठिन है।
मन तो ठहरा बिन लगाम का, जिसे तुझको ही कसनी होगी।।
बिन गुरु कृपा सुलभ न कुछ भी, शरण उनकी गहनी होगी।
गुरु की सेवा तू पहले कर ले, साधना उनकी करनी होगी।।
गुरु रूप स्थूल शरीर है, सूक्ष्म रूप में प्रभु उनमें हैं बसते।
साधन सुगम, सरल वह बतलाते, माला उनकी जपनी होगी।।
तब जाकर प्रभु दर्शन देंगे, गुरु- मुख तुझको बनना होगा।
' नीरज' गुरु इच्छा पर चल कर देख, प्रभु की कृपा तुझ पर होगी।।
