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AVINASH KUMAR

Tragedy

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AVINASH KUMAR

Tragedy

पराये दर्द में

पराये दर्द में

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पराये दर्द में अपनी आँखे नम कौन करता है

बहते हुए अश्कों को यहाँ कम कौन करता है,


चले जाते हैं सूखे शज़र से परिंदे भी उड़कर

गमों के मारों से मोहब्ब्त कौन करता है,


पसंद आते हैं खिले महकते गुलाब ही सबको

मुरझाये हुए फूलों की चाहत कौन करता है,


वक्त सही हो लोग बिठा लेते हैं पलको पर ही

उजड़े हुए पे आंचल की छाया कौन करता है,


वो आँधियों में नीचे गिरकर ही मर जाते हैं

गिरे हुए परिंदों को घोसलों में कौन करता है,


चमकते सिक्कों को भी लोग लगाते सीने से

धूल में दबे हीरों पे इनायत कौन करता है,


डगमगाते जहाज़ से भाग जाते हैं मुसाफिर

डूबती हुई कस्ती पर सवारी कौन करता है,


प्यास में ही लोग जाते हैं दरिया के पास कुमार

जहाँ में बिन मतलब के दोस्ती कौन करता है.


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