पिता
पिता
मानती हूं आपको अपना आदर्श,
सीखना चाहती आपसे बहुत कुछ,
पर कह नहीं पाती कभी कुछ,
दिखाते आप भी कितने सख्त हो,
पर जानती मैं करते आप मुझसे बहुत प्यार हो,
कहती मां से हमेशा पापा डांटते हैं,
पर अंदर ही अंदर जानती मेरी भलाई है उसमें छिपी,
क्यों ऐसी रीत समाज की,
होती बेटी की ही विदाई,
मैं भी आपके दिल का टुकड़ा हूं,
कैसे आपके बिन रह पाऊंगी,
दिन भर आपकी आवाज सुनने को तरसती थी,
हमेशा पास मां के रहती थी,
जाते आप काम पर ताकि रह पाऊं में आराम से,
कर पाओ आप मेरी हर इच्छा को पूरी,
पर कुछ समय ही तो आपसे मांगती हूं,
बैठूं आपसे बात करूं यही तो चाहती हूं,
पापा आपकी परछाई मैं कहलाती हूं,
फिर भला कैसे मुझे अपने से दूर भेज रहे हो,
कैसे रखोगे अपना ध्यान यह बात मुझे सताती है,
मां से ज्यादा आपको मेरी याद सताएगी यह भी जानती हूं,
फिर क्यों मेरी शादी कर रहे हो रहने दो अपने साथ,
मैं बन आपका बेटा आपका सहारा बनूंगी,
आपको कभी बेटे की कमी महसूस नहीं होने दूंगी,
पापा बेशक मुझे मिला लड़की का जन्म है,
पर बेटे से क्या हम कम है,
माना वो वंश है तो हम भी आपका अंश है।
