STORYMIRROR

Nitesh 'Neel

Inspirational

4  

Nitesh 'Neel

Inspirational

मां

मां

1 min
270

बहुत कुछ लिखता हूँ,

थोड़ा छूट जाता है,


दास्तान-ए-माशूक लिखता हूं,

मां के अंचल का बिछौना छूट जाता है,


दुनिया जहां को समेट देता हूं शब्दों में,

मगर घर का एक कोना छूट जाता है,


महबूब की बांहों को लिखता हूं आराम,

मां का रोना छूट जाता है,


किसी के गेसुओं की उलझन याद है लिखा है,

मां का दिया मिट्टी का खिलौना भूल जाता हूं,


जाने कैसे अजनबी को जन्नत लिख दिया है नील,

कैसे मां का होना भूल जाता हूं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Nitesh 'Neel

हस्ती

हस्ती

1 min पढ़ें

कहां?

कहां?

1 min पढ़ें

मां

मां

1 min पढ़ें

वहम

वहम

1 min पढ़ें

तुलना

तुलना

1 min पढ़ें

जीवन

जीवन

1 min पढ़ें

उफ़

उफ़

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Inspirational