STORYMIRROR

Nitesh 'Neel

Abstract Romance

4  

Nitesh 'Neel

Abstract Romance

क्या करें

क्या करें

1 min
273

दिल फिर उसको ही चाहे, तो क्या करें

नाम उसका, हथेली पर उतर आए, तो क्या करें।


जिसे भूलना चाहें, और भूला ना पाएं

वक्त उसका हाथ, थामे चले आए, तो क्या करें।


पीते हैं के पीने से कुछ होश नहीं रहता

मदहोशी में भी, होश वही आकर दिलाए, तो क्या करें।


ये ज़ेहन में डाल कर चलते हैं, उसके रास्ते नही चलना

मगर कभी राह भटक जाएं, तो क्या करें।


जिसका नींदों पे पहरा है, जो सोने नहीं देता

सुबहा वही आकर जगाए, तो क्या करें।


कहने को दूर हैं वो, पर दूर होने नहीं देते

ये खयाल हकीकत नज़र आए, तो क्या करें।


तुम खुदको भूल चुके हो नील" आईना नहीं देखते

कोई गैर तुम में नज़र आए, तो क्या करें।

दिल फिर उसको ही चाहे, तो क्या करें।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Nitesh 'Neel

हस्ती

हस्ती

1 min पढ़ें

कहां?

कहां?

1 min पढ़ें

मां

मां

1 min पढ़ें

वहम

वहम

1 min पढ़ें

तुलना

तुलना

1 min पढ़ें

जीवन

जीवन

1 min पढ़ें

उफ़

उफ़

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Abstract