STORYMIRROR

Veena Siddhesh

Abstract

4  

Veena Siddhesh

Abstract

फ़ुरसत

फ़ुरसत

1 min
49

एक मुद्दत से आरज़ू थी फुर्सत मिले

फुर्सत मिले तो कुछ मिलें चलो

फुर्सत मिली पर इजाज़त नहीं मिलने मिलाने की

ऐसा गर है तो ऐसा ही सही


अब फुर्सत मिली है तो चलो खुद से मिलो

कुछ अपनी कहो कुछ दिल की सुनो

कुछ लम्हे अपने लिए चुनो

सांस गहरी लो, आराम करो


कुछ भूले ख्वाबों की तामीर करो

हवाएं जो साफ बह रही हैं महसूस करो

क्या पता फिर ये मंज़र हो न हो

पंछी जो गा रहे हैं उन्हें ताल दो


अंगड़ाई लो मशक्कत टाल दो

एक तस्वीर जो अधूरी पड़ी है

रंगों में उसे ढाल दो

फुर्सत मिली है हुज़ूर किसी नियामत से कम नहीं


ये किसने कहा कि ज़माने में गम नहीं

गम औे तकलीफ पे कसीदे किसी और दिन पढ़ेंगे

आज फुर्सत मिली है तो खुल के हंसेगे और जिएंगे।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Veena Siddhesh

Similar hindi poem from Abstract