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Veena Siddhesh

Abstract


4.5  

Veena Siddhesh

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बेमतलब

बेमतलब

1 min 301 1 min 301

कुछ बातें बेमतलब ही रहने दो

हर बात का मतलब होना ज़रूरी तो नहीं


कभी ज़िन्दगी का दरिया बस यूं ही बहने दो

मंजिलें हर राह की हों,ये ज़रूरी तो नहीं


अनकहे खामोश मंज़र निगाहों में जज़्ब कर लूं मैं

बस इतना सा सुकूं चाहिए, ये तो कहने दो


कुछ बातें बेमतलब ही रहने दो।


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