STORYMIRROR

Anuradha Negi

Drama

4  

Anuradha Negi

Drama

पहली नजर

पहली नजर

1 min
385

मैंने चाहा था उसको जो मेरा ना था 

जिसके टूटने से मांग लूं तुझे 

आसमान में ऐसा सितारा ना था 

मैंने तो रब से मांगा भी था तुझको 

पर तुम हम एक हो जाये

ये रब को भी गवारा ना था।

बस एक ही नजर तो देखा था उसे 

और फिर पलकें झुका ली थी मैंने 

समा गए तुम इस तरह आंखों में 

फिर ना देखा था किसी और को मैंने।

सिर्फ सोचते और तुम्हें सोचते रहते 

न कुछ कह पाते ना कभी बता पाते

चाहते भी तो आखिर किसे कहते हैं

तुम्हें तो मालूम ही नहीं था कि

तुम ही बस हो इस दिल में रहते।

कोशिश बहुत की मैंने कह दूं तुमसे 

हां तुमको बसा लिया था खुद में

पर हार जाने का डर इतना सताया

कि तुम्हें हम मिला ना पाए खुद हमसे।

आखिर इंतजार खत्म हुआ और 

जाहिर कराई थी अपनी मन की बात 

पर तुमने मुंह मोड़ लिया तब ऐसा 

फिर सो ना पाए हम उसके बाद।

चले आओ ना प्यार आज भी है

वही एहसास और वही बात भी है 

बताओ क्यों रास नहीं आए हम तुम्हें 

शायद मेरी लकीरें नहीं साथ हैं और 

तुम्हारे हाथों में कोई और हाथ है।

                    


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama