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Madan lal Rana

Abstract Inspirational

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Madan lal Rana

Abstract Inspirational

पहली बारिश

पहली बारिश

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पहली बारिश के बादल जैसे आंखों के अरमान,

पहली बारिश के बादल जैसे किसानों के मेहमान।


सूखे खेत ,सूना आंगन,

खाली मड़ैया, चिंतित गैया,

इत-उत पसरा मौत सा मातम,

घर में हो जैसे श्मशान।

पहली बारिश.....


भोलू के बाबा मुन्नी की अम्मा,

बैठ उदास करते फरियाद,

हाथ जोड़ कर विनती करते,

भेजो बरखा कृपा निधान।

पहली बारिश.....


असंख्य उम्मीदें, हाथ पसारे,

रिक्त नीले आकाश निहारे,

काश, कहीं भी दिख जाते,

वो बादल बेईमान।

पहली बारिश.....


एक दिन जोर की आंधी आयी,

साथ में जल की कुछ बूंदें लायीं,

चमचम-चमचम बिजली चमकी,

गड़-गड़ गरज पड़ा आसमान।

पहली बारिश.....


खुश्क मौसम ने ली अंगड़ाई,

फिर नभ पे घटाएं घनघोर छाईं,

लगे बरसने पानी झम-झम,

तृप्त हुए हर तन और प्राण।

पहली बारिश.....,


कारी गैया नूरी की मैया,

हर्षित अम्मी ले रहीं बलैयां,

दौड़ी मुन्नी बाबा संग आई,

और पहली बारिश में किया अस्नान।

पहली बारिश.....



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