STORYMIRROR

garima agarwal

Classics

3  

garima agarwal

Classics

फ़ितरत

फ़ितरत

1 min
87

मौसम और इश्क़

दोनों की फितरत एक जैसी है। 


कभी पतझड़ बन कर सारी रोनक छीन लेते है, 

तो कभी हर डाली पर फूल खिलखिलाते है। 


कभी ठंडी हवाएं बर्फ़ बन कर गिरती है, 

तो कभी गर्म हवायें आग बरसाती है।


ढक देती है बर्फ़ की परत जिन पहाड़ियों को, 

वही धूप पड़ते ही वो नदिया बन कर बह जाती है। 


रंग हजार है इस कुरदत के भी देखों, 

फिर इश्क़ तो बेमतलब ही बेवफ़ाई का नाम ले जाता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics