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Mukesh Bissa

Inspirational


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Mukesh Bissa

Inspirational


फिर वोही रात

फिर वोही रात

1 min 203 1 min 203


रोज रात में

सोचता हूं मैं भी

खुद से ही कर लेता

हूँ दो चार बातें

कुछ मुलाकातें

जो किसी से

न कह सका

वो अपने से ही

बतिया लेता हूं


दिन भर की 

रेलमपेल में अगर

हँस न पाया तो

अकेला ही 

मुस्कुरा देता हूं

रह गई कितनी बातें

कहने को

कुछ दिल से 

निकाल लेता हूं


घर कर लेता कुछ

जो कोई सुनता नहीं

उसे याद कर लेता हूं

अगर मिलते ग़म तो

बस चुपचाप से

पी लेता हूँ

फिर इसके

बस गुनगुना लेता हूं

अपने मे खो 

ही जाता हूँ



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