STORYMIRROR

Mahendra Rathod

Inspirational

2  

Mahendra Rathod

Inspirational

पहचान

पहचान

1 min
326


रूठ जाए किसी से तो हम खुद टूट जाएंगे

बैशाखी तो टूटी है फिर तो कैसे उठ पाएंगे।


इश्क़ की राह पर चलना शोलों से कम नहीं

बीच राह में जो घबरा गए तो कैसे जुट पाएंगे।


सोचते हैं लोग क्यूँ मेरे न रुकने की बात पर

खुद पे हो अगर यकीं तो कैसे झुक पाएंगे।


जिक्र न करे कोई तो क्या, पहचान खुद बनो

किसी और के पंख लेकर कैसे उड़ पाएंगे।


तोड़ने पर टूटते हैं वो सितारे नहीं कहलाते

मूल हमारा है किसे पता फिर कैसे बिक पाएंगे।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational