STORYMIRROR

Mahendra Rathod

Classics

3  

Mahendra Rathod

Classics

एक अजनबी

एक अजनबी

1 min
217

हम भी गए थे एक बार किसी के आंगन में

झुकी सी नजरें थामे कोई अजनबी बैठा था।


लब्ज आए थे होठों पर शायद हमें वो देख ले

सुनने को बात किसी ओर की अजनबी बैठा था।


हमने मोड़ लिए कदम अपने उसके आंगन से

एक आहट भी ना सुने कोई अजनबी बैठा था।


जाकर दूर थोड़े हमने भी देखा उसके एतबार को

कहती निगाहें लेकर वहां कोई अजनबी बैठा था।


आज घर भी वही है और आंगन भी वही है यहां

नही है यहां कोई अपना जो वही अजनबी बैठा था।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics