STORYMIRROR

Madhu Gupta "अपराजिता"

Classics

4  

Madhu Gupta "अपराजिता"

Classics

"पौराणिक कथा माँ शबरी "

"पौराणिक कथा माँ शबरी "

2 mins
439

यह कथा है माता शबरी की 

हुआ जन्म भील समुदाय में उनका 

श्रमणा और शबरी दो बड़े ही प्यारे उनके नाम

 कोमल हृदय और राम भक्ति में रहती वो लीन ll

 हुआ विवाह तय भील कुमार से उनका

चलन विवाह में ऐसा भी था 

निर्दोष पशुओं को था मारा जाता 

विचलित मन ये देख सका ना 

मानो ऐसा पाप हुआ क्या ll

सोच अनेक निर्दोष पशुओं की बलि को 

छोड़ चली घर विवाह से इक दिन पहले

पहुंची दडकारण्य वन में वो

था निवास उस वन में ऋषि मतंग का ll

मन में बहुत प्रबल इच्छा थी 

सेवा करे मन से मुनिवर की 

पर जाति से थी भील बिचारी  

उपाय निकाला मन में तब इक ऐसा ll

 जिस रस्ते से मुनिवर जाते 

काँटों और कंकड़ से था वह चूर 

नित्य सुबह उठकर वह करती 

वो उस रास्ते को नियम से साफ 

और चुपचाप बिछाती बालू उसपर 

 नियम नित्य ये बना लिया था अपना ll

देख कर एक दिन भक्ति उनकी 

हो गए ऋषि भाव विभोर 

और तब साथ ले चले संग कुटिया में वो अपनी 

 पाकर साथ मुनिवर का सबरी 

 मन से हो गई मुनिवर की दास ll

तन मन से करने लगी सेवा अपने मुनिवर की

जब अंत समय आया मुनिवर का

तो वह कह गए उनसे मुंह खोल 

आएंगे इक दिन तुझसे मिलने 

इस कुटिया में तेरे राम ll

कई बरसों तक की कठिन प्रतीक्षा

मिलने अपने प्यारे राम की खातिर

 रोज सजाती आसन उनका 

 और रास्ता भी कर दी थी साफ़ ll

 नित्य रोज तोड़ कर लाती

डलिया भर वो मीठे बेर  

 चख- चख भरती डलिया रोज

नयन बिछाएं कुटिया में अपनी 

करती प्रतीक्षा आने की उनकी ll

सफल हुई तपस्या इक दिन उनकी 

आ गए द्वार पर उनके राम  

बड़े चाव से झूठे बेर मां शबरी ने दिए खिलाए 

धन्य हो गया जीवन उनका 

मिल गए उनको अपने राम ll


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics