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मिली साहा

Abstract Tragedy

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मिली साहा

Abstract Tragedy

पौराणिक कथा-एकदंत गणेशा

पौराणिक कथा-एकदंत गणेशा

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गणाधिपति भगवान श्री गणेश की, महिमा अनंत,

चलिए जानते हैं, कैसे पड़ा था नाम इनका एकदंत,

बड़ी प्रचलित और रोचक है, पौराणिक एक कथा, 

बुद्धि, विवेक में अग्रिम जो, है उन्हीं की यह गाथा।


श्री गणेश जी को, यह एकदंत रूप मिला था, परशुराम से,

शक्ति थी उनमें अपार, करते थे प्रेम भक्ति वो, शिव नाम से,

परम भक्त परशुराम, भगवान शिव दर्शन के थे अभिलाषी,

किंतु गहन ध्यान मुद्रा में लीन बैठे, भगवान शिव कैलाशी।


पिता शिव का ध्यान भंग ना हो श्री गणेश ने ली जिम्मेदारी,

वचन दिया पिता को यहीं कैलाश द्वार पर करेंगे चौकीदारी,

परशुराम ने जब जताई इच्छा, भगवान शंकर से मिलने की,

रोका उन्होंने इजाजत नहीं किसी को, ध्यान भंग करने की।


परशुराम भी अड़ गए ज़िद पर, मिले बिना तो नहीं जाएंगे,

भगवान शिव के दर्शन हेतु आज हर बाधा मार्ग से हटाएंगे,

भोली भाली मीठी बातों से पहले तो श्री गणेश ने समझाया,

किंतु परशुराम ने बार-बार क्रोध से, गणपति को उकसाया।


करते रहे विनती श्री गणेश बार-बार, युद्ध उन्हें भाता नहीं,

प्यार से सुलझाना जाने हर कार्य वो क्रोध उन्हें आता नहीं,

विनम्रता से टालने की कोशिश में, परशुराम का धैर्य टूटा,

भोली सूरत करके अनदेखा, उन्होंने युद्ध के लिए ललकारा।


मजबूर हो गए, श्री गणेश जी, परशुराम से युद्ध करने को,

कोई विकल्प ना था, अब तैयार हुए परशुराम से लड़ने को,

भगवान गणेश और परशुराम में तब एक भीषण युद्ध हुआ,

विफल करते गए श्री गणेश, प्रत्येक वार परशुराम का दिया।


विफल होता हर वार देखकर परशुराम क्रोध वशीभूत हुए,

क्रोध अग्नि में जल शिव से प्राप्त परशु का प्रयोग कर गए,

पिता शिव से प्राप्त, इस शस्त्र का, मान रखा श्री गणेश ने,

एक दांत टूटा उनका, स्वयं पर प्रहार ले लिया श्री गणेश ने।


एकदंत हुए भगवान गणेश, असीम पीड़ा से वो कराह उठे,

क्रोध वशीभूत होकर कैसा कृत्य किया परशुराम चौंक उठे,

पुत्र की पीड़ा देख क्रोधित हुई माता पार्वती दुर्गा रूप लिया,

क्षमा करो हे! माँ भूल हुई है माता जो मैंने पाप ऐसा किया।


शांत हुई माँ दुर्गा, जब परशुराम को भूल का हुआ एहसास,

कहा परशुराम ने माता से हे माता यह बालक बड़ा है खास,

कीर्तिमान, धैर्यवान है, कम होगा जितना भी करूँ गुणगान, 

इस प्रकार प्रथम पूजनीय देव, कहलाए एकदंत भगवान।



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