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सीमा शर्मा सृजिता

Romance

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सीमा शर्मा सृजिता

Romance

पावनी

पावनी

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तुम्हारी आंखें सागर सी हैं 

बहुत गहरी 

उनमें डूबने के लिए 

देखो ! मैं नदी हो रही हूं 


तुम्हारी बातें अम्बर सी हैं 

अनंत - असीम 

उन्हें सुनने के लिए 

देखो! मैं जमीं हो गई हूं 


तुम्हारे साये में गुजरी शामें 

बडी़ खूबसूरत हैं 

इन्हें जीते जीते 

देखो! मैं सुरमयी हो रही हूं 


तुम्हारी बाहें मेरा सुकुन घर हैं 

तुम्हारी बाहों में रहना मेरी ख्याहिश

तुम्हारे इतने करीब आकर

देखो ! मैं तुम्हीं हो रही हूं 


तुम्हारी मुहब्बत मंदिर सी है 

पावन और पवित्र

उसको पाकर 

देखो ! मैं पावनी हो रही हूं |



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